yashoda jayanti 2024: तिथि और शुभ समय, पूजा विधि, महत्व

yashoda jayanti 2024
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yashoda jayanti 2024: यशोदा जयंती भारतीय हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण एक त्योहार है जो भगवान कृष्ण की माता यशोदा की जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व हर वर्ष चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। यशोदा जी को श्रीकृष्ण की माँ माना जाता है, और उनके प्यार और ममता को यशोदा जयंती के इस अवसर पर याद किया जाता है।

यशोदा जयंती का आयोजन प्रायः मठों और मंदिरों में किया जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण की यशोदा जी के साथ लीलाएँ और किस्से सुनाए जाते हैं, जिनमें उनके बचपन के अनेक चरित्र शामिल होते हैं। भक्त इस दिन यशोदा जी की पूजा करते हैं और उनके गुणों की महिमा गाते हैं।

यशोदा जयंती का मुख्य उद्देश्य भगवान कृष्ण की माँ यशोदा जी के प्रति आदर और श्रद्धांजलि व्यक्त करना है। यह एक पावन अवसर है जब भगवान के भक्त उनकी माँ की ममता और प्यार को याद करते हैं और उनके चरित्र की महिमा को स्मरण करते हैं। इस दिन कई स्थानों पर भक्तों ने सेवा और समर्पण के रूप में भोग और प्रसाद बाँटने का भी आयोजन किया जाता है।

यशोदा जयंती का अर्थिक महत्व भी है, क्योंकि इस दिन अनेक सामाजिक कार्यक्रम और कला की प्रस्तुतियाँ भी आयोजित की जाती हैं। यह एक उत्कृष्ट मौका है भगवान कृष्ण की माँ के गुणों और महिमा को समझने और मानने का। यशोदा जी की प्रेरणा से, माँ के प्यार और समर्पण की भावना को समझने का यह अवसर भगवान कृष्ण के भक्तों को आत्मिक ऊर्जा और नया जोश प्रदान करता है।

इस पर्व के दौरान, लोग अपने दोस्तों और परिवार के साथ भगवान कृष्ण की चरित्र की विभिन्न रूपांतरण करते हैं। उन्हें प्यार और समर्पण की भावना से अपने जीवन में सजीव करने का संदेश दिया जाता है। यह एक धार्मिक उत्सव है जो लोगों को भगवान की भावना में लीन करता है और उन्हें उसकी उपासना में नया जोश और उत्साह प्रदान करता है।


यशोदा जयंती 2024 तिथि और शुभ समय

फाल्गुन महीने में 1 मार्च, 2024 शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा. इस दिन षष्ठी तिथि का प्रारम्भ 1 मार्च 2024 को सुबह 6 बजकर 21 मिनट पर होगा और षष्ठी तिथि का समापन 2 मार्च 2024 को सुबह 7 बजकर 53 मिनट पर होगा


🌺 यशोदा जयंती का पूजा विधि 🙏

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यशोदा जयंती का पूजा विधि महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है जो हिंदू धर्म में माँ यशोदा को समर्पित है। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मनाया जाता है। इस दिन यशोदा माता का पूजन करने से भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्ति होती है और उनका आशीर्वाद मिलता है।

यशोदा जयंती के पूजन में पहले तो यशोदा माता की मूर्ति को सजाया जाता है। फिर पूजन के लिए जल, दूध, दही, घी, चावल, फल, पुष्प और नैवेद्य इत्यादि का एक थाल तैयार किया जाता है। पूजन के दौरान मंत्रों का जाप किया जाता है और यशोदा माता की पूजा की जाती है।

इस दिन कान्हा की विशेष पूजा की जाती है और उनके बाल लीलाएं याद की जाती हैं। यशोदा माता के अत्यंत प्रिय भक्त होने के कारण, इस दिन उनके पूजन से भगवान कृष्ण भी अत्यधिक प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की समस्याओं को दूर करते हैं।

यशोदा जयंती का उत्सव विशेष धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान कृष्ण के लीला के किस्से सुनाए जाते हैं और भजन की धुनें गाई जाती हैं। इस दिन भगवान कृष्ण के भक्तों की सभा में भजन की जाती है और विभिन्न रंग-बिरंगे प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।

यशोदा जयंती के दिन भगवान कृष्ण की पूजा के साथ-साथ उनकी माँ का भी पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण की कृपा और यशोदा माता की कृपा से सभी की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उनकी कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

FAQ-(सामान्य प्रश्न ) 

यशोदा किसका अवतार है?

यशोदा मैया की मृत्यु कैसे हुई थी?

यशोदा की जाति क्या थी?

माता जसोदा पिछले जन्म में कौन थी?

पिछले जन्म में यशोदा कौन थी?

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