Tulsi Vivah क्यों मनाया जाता है ? - पूरी जानकारी।

Tulsi Vivah एक हिंदू धार्मिक पर्व है जिसे तुलसी के विवाह के अनुष्ठान के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व का अर्थ है तुलसी, जो एक पवित्र वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक है, उसकी विवाह की रीतिवाज़। तुलसी विवाह हिंदू संस्कृति में महत्व पूर्ण है और यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है।

tulsi vivah क्यों मनाया जाता है ? - पूरी जानकारी।

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 तुलसी, या तुलसी, एक पवित्र पौधा है जो विष्णु की भक्ति में महत्तव रखता है। इसे लक्ष्मी का रूप भी माना जाता है। tulsi vivah की कथा भगवान विष्णु और तुलसी के बीच प्रेम कथा पर आधारित है। कथानुसर, एक समय पर भगवान विष्णु अपने परम भक्त वृंदा को मोहित करने के लिए उनकी तपस्या रूप में आये। वृंदा, जो तुलसी के रूप में थी, उनको प्रति विशेष प्रेम भावना रख रही थी।


 


 भगवान विष्णु ने वृंदा के सामने अपने असली रूप में आकर उन्हें चक्रायुध और शंख दिखाया, जिससे वृंदा का मन मोहित हो गया। इस पार, वृंदा ने भगवान विष्णु से शादी करने की इच्छा व्यक्त की। भगवान विष्णु ने इस विरोध को स्वीकार किया, लेकिन उन्हें अपने असली रूप को छुपाकर वृंदा के सामने भगवान शालिग्राम के रूप में दर्शन दिए।


 इस घटना के बाद, वृंदा ने अपने पति के रूप में शालिग्राम को पहचान लिया। कुछ समय के बाद, एक दुर्घटना में वृंदा का पति मर गया। वृंदा ने अपने पति की मृत देह पर तपस्या की, जिसका कारण उनकी शक्ति ने अपने पति को पुन: जीवित कर दिया, लेकिन उनके रूप में शालिग्राम का साक्षातकार नहीं हो सका।


 इस घाटना के बाद, वृंदा ने अपने पति के साथ समर्पण भाव से तपस्या की और भगवान विष्णु ने उनकी तपस्या को स्वीकार किया। विष्णु ने उन्हें शालिग्राम के रूप में अपना आशीर्वाद दिया और कहा कि वर्तमान भविष्य में वह तुलसी पोधा के रूप में प्राप्त होगी। यही कारण है कि तुलसी विवाह में भक्त लोग तुलसी को विष्णु की पत्नी के रूप में पूजते हैं।


 Tulsi Vivah के दिन, भक्तों ने तुलसी को सजावत किया जाता है और फिर विष्णु के साथ उनकी रीतिरिवाज के अनुरूप विवाह किया जाता है। इस दिन, भक्त तुलसी को कन्यादान करते हैं और उसके विवाह की परंपरा के अनुसार शादी करते हैं। विवाह के बाद, तुलसी को घर के मंदिर में स्थापित किया जाता है और उसकी सेवा भगवान विष्णु की भक्ति में होती है।


 क्या दिन भक्तों में अनुष्ठान, कीर्तन और भ तुलसी जन भी किये जाते हैं। तुलसी विवाह से जुड़ी कथा और रस्मों का महत्व है, जो हिंदू संस्कृति में एक पवित्र और धार्मिक पर्व के रूप में मनाया जाता है।


तुलसी की पूजा किस दिन करनी चाहिए ?


tulsi vivah क्यों मनाया जाता है ? - पूरी जानकारी।


तुलसी पूजा हिंदू कैलेंडर के कार्तिक माह में एकादशी तिथि को मनाई जाती है, लेकिन इसे द्वादशी तिथि भी चुन सकते हैं। इसमे किसी भी व्रत या त्यौहार को बनाने के लिए कुछ नियम होते हैं, और इसे गलत तिथि पर करने से धार्मिक मान्यताओं में विघ्न उत्पन्न हो सकता है।

 क्या पूजा का महत्व है क्योंकि तुलसी माता को भगवान विष्णु के रूप में पूजा जाता है। तुलसी पूजा का आरंभ संध्या के समय होता है और प्रातः काल तक चलता है। भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी को प्रधान रूप से प्रयोग किया जाता है, जिसके पत्ते, फूल और दाल का प्रयोग होता है। इस दिन व्यक्ति तुलसी के वृक्ष के चरण स्पर्श करते हैं, जिसे पवित्र स्पर्श भी कहते हैं।

 तुलसी पूजा का महत्व धार्मिक दृष्टि से है, क्योंकि इसे करने से मनुष्य का जीवन मंगलमय होता है और उसकी रक्षा कवच बनता है। इसके अतिरिकत, तुलसी का पौधा घर के पास रखने से घर में शांति बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने में मदद मिलती है।

 यदि आप तुलसी पूजा को गलत तिथि पर करते हैं, तो इसका फल आपको प्राप्त नहीं होगा और इसमें धार्मिक दोष भी हो सकता है। इसलिए, तुलसी पूजा की सही तिथि का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।

तुलसी पूजा हिंदू धर्म के अनुयाइयों के लिए एक पवित्र पर्व है, जो भगवान विष्णु की पूजा में महत्वपूर्ण पूर्ण स्थान है।  पूजा की सही तिथि पर धार्मिक दृष्टि से ध्यान देना अनिवार्य है, अन्यथा धार्मिक दोष उत्पन्न हो सकता है।  तुलसी पूजा से घर में शांति बनी रहती है और मनुष्य का जीवन मंगलमय हो जाता है।  इसलिए, इसे संवेदनात्मक भावनाओं के साथ और धार्मिक आस्था का पालन करना चाहिए।




FAQ-(सामान्य प्रश्न)

विष्णु ने तुलसी से शादी क्यों की?

तुलसी विवाह क्यों करवाया जाता है?

तुलसी का असली पति कौन है?

तुलसी विवाह का इतिहास क्या है?

तुलसी विवाह कितने बजे से कितने बजे तक है?

तुलसी विवाह कब करना चाहिए?

तुलसी का विवाह कैसे किया जाता है?


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